चोर मचाये शोर , चोरों की जग में ।
रीत यह बड़ी पुरानी है ।
चौकीदार शांत बड़ा है ,
अभी तो लट्ठ हल्का ही चला है ।
अभी तो , शूल-त्रिशूल बाकी है ।
अभी तो शांत होकर कर रहा ,
सामना यह चोरों का ।
अभी तो चौकीदार का रुद्र रूप ,
तांडव बाकी है ।
इस चौकीदार का अंदाज़ ,
बड़ा निराला है ।
जड़ खोद कर निकालेगा यह ,
विष-वृक्ष वन-उपवन से ।
रखो भरोसा , इस माली पर ।
यह माली बड़ा हिम्मत वाला है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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