बस इक हवा का झौंका सा ,
आना ये तेरा ।
झंझोड़ कर मेरे दिल की , बगिया को ।
जिसमें है , लाखों अरमान दफन ।
उनको जगा कर , जाना तेरा ।
न जाने कब होगा वो पल , फुर्सत का तेरा ।
जब मेरे साथ होगा , ठहर जाना तेरा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
बस इक हवा का झौंका सा ,
आना ये तेरा ।
झंझोड़ कर मेरे दिल की , बगिया को ।
जिसमें है , लाखों अरमान दफन ।
उनको जगा कर , जाना तेरा ।
न जाने कब होगा वो पल , फुर्सत का तेरा ।
जब मेरे साथ होगा , ठहर जाना तेरा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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