मन पपीहा बोले रे बोले रे !
क्या बोले रे क्या बोले रे !
तुम बिन जिया उदास है ,
कैसी ये अनबुझ प्यास है ।
आ जा आ जा आ जा
आयी है रुत ये बनके अलबेली ,
मैं हूँ पीया तुम बिन यहां अकेली !
तुम बिन अकेली ।
जलता मन मोरा , जलती है काया ।
तुम आओ पिया मोरे , बनकर छाया ,
बन कर छाया ।
मन पपीहा बोले रे बोले रे !
क्या बोले रे क्या बोले रे !
जबसे गए तुम प्रदेश बलम मोरे ,
बैरन बन गयी , मोरी रतियाँ ।
आई न निंदिया , इन अँखियन में ।
अँखियाँ जोहे है पिया , ये बाट तोरे ।
मैं जीवन तुम , प्राण मोरे ,
जियूंगी कैसें , मैं बिन तोरे , मैं बिन तोरे ।
आ जा आ जा आ जा
मन पपीहा बोले रे , बोले रे ।
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें