प्रफुल्लित पुलकित हृदय मेरा , आलिंगन को आतुर हुआ ।
तेरी नूतन निच्छल प्रेम की ,शीतल छाओं में ।
तेरे निर्मल हृदय की , मधुर प्रेम रसधाराओं में ।
हृदय में लिए मैं , छवि तुम्हारी ।
आनंदमयी अनुभूति का ,संचार हुआ।
सच , हो विश्वास , तुम्हे तो ।
ऐसा हर्षित मन मेरा , जीवन में पहली बार हुआ ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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