तुम आ जाना मेरे शहर , मत घबराना ।
मैं तुझे मिलूंगा नही , रहूंगा मैं अनजाना ।
कब आओगे तुम बस , ये जरूर बता जाना ।
मैं दिल को , अपने समझा लूँगा ।
तरस गयी है ये आंखे , तुम्हें देखने को ।
आ जाए करार वर्षों बाद , मेरी इन आंखों को ।
न करीब आऊंगा दूर से ही , तुझे देखकर चला जाऊंगा ।
मेरे दिल की फिक्र न कर , दिल को मैं समझा लूँगा ।
कब आओगे तुम बस , ये जरूर बता जाना ।
न खबर होगी किसी को भी , मेरे आने की ।
बेख़बर मैं तुम्हें भी , कर जाऊंगा ।
तुम आ जाना मेरे शहर , मत घबराना ।
मैं तुझे मिलूंगा नही , रहूंगा मैं अनजाना ।
"तुम याद बहुत आती हो"
होगी गुज़र जिस राह पर तेरी ,
उस राह के मोड़ पर ।
अपने दिल के निशाँ छोड़ जाऊंगा ।
तुम आ जाना मेरे शहर , मत घबराना ।
मैं तुझे मिलूंगा नही , रहूंगा मैं अनजाना ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें