बर्षों के बाद खिला है आज , फूल मेरे दिल के आंगन में ।
देख के इसकी रंगत को , जी करता है बस देखता ही रहूं ।
गीले-शिकवे सब दूर हुए संग , आंसुओं की कतारों में ।
नव ज्योति उमंग भरी ,प्यार की जल उठी है अब ।
जरा ठहर जा , कुछ देर और पास मेरे ।
बर्षो के बाद आई है आज , रौनकें इन बहारों में ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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