पारस है सरस है , ख़ालिस है ।
राष्ट्रहित में ,
"बीजेपी"
अग्रिम पंक्ति में खड़ी है ।
निरन्तर ततपरता से ।।
हौंसले बुलंद है ,
भय की कोई शिकन नही ।
गिद्ध दृष्टि थी जिनकी ,
देश को नौच खाने की ।
अंदर हो या बाहर ।
"दुश्मन"
भयभीत है अब वो सारे ,
फड़फड़ा रहे है वो पंख अपने ,
आफत में पड़ी है अब , उनकी जान ।
नही मिल रहा है अब ,
उनको हराम का कुछ खाने को ।
फीकी पड़ गयी है उनकी शान ।
अखंड भारत का स्वप्न सहेजे ,
कदम दर कदम प्रयासरत ।
शनैः शनैः बढ़ते पद "भारत" के अब ,
विकास पथ पर, उच्च शिखर की ओर ।
भारतीय जनता पार्टी ,
सदैव देश एवं जनता हित में तत्पर ।
बंदेमातरम ! भारत माता की जय !
जय श्री राम !
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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