क्यों चुप चुप कर ही , खून अपना यूँ ही जलाते हो ।
रावण है यह तो , कोई राम तो बनो ।
जला डालो इसकी लंका ,
साहस करो ।
कोई तो वीर हनुमान बनो ।
बज्र इंद्र का चक्र सुदर्शन, त्रिशूल में महाकाल बनो ।
मिटा दो धूर्तों को जो, संकट आन बने सनातन का ।
हो जाओ इक जुट ,सब सनातनी ।
हिंदुत्व की ढाल बनो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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