फालतू की बाते मत कीजिये साहब !
यहाँ तो लोग हिमायती बनकर , जख्मों पर नमक छिड़क जाते है ।
कुछ लोग हैं अहसान फरामोश , खाते भारत का और , दुश्मनों का गुणगान गाते है ।
बड़ी सहजता से कुछ लोग कमी , अपनी छुपा जाते है ।
देखते नही कोढ़ अपना और , दूसरे के फुंसियों से घृणा कर जाते है ।
छीन गयी कुर्सी उनकी तो , उनकी बैचैनी का आलम देखो ।
सूरत ए हाल देख कर अपना , आईना ही तोड़ जाते है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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