हम भी आपके ही राह के मुसाफिर है ।
कुछ तो असर मुझमे भी हुआ आपका ।।
चल लेंगे कदम दो-चार और साथ आपके तो ।
वाह ! फिर तो अलग ही कुछ और नज़ारे है ।।
यह चुम्मा😘 उन्हें ही देते है हम , शब्बा ख़ैर का ।
जो हमें अपनी ज्यान से भी ज्यादा प्यारे है ।।
😘😘
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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