जीवन एक नदिया है , सुख दुख दो किनारे है।
न जाने कहाँ मंजिल , कौन सहारे है ।
कभी सुख का सवेरा है , जीने की हसरत है ।
कभी गम की सांझ है , तन्हाइयों की रातें है ।
यही जीवन की , हैरान की बातें है ।
रुख़सत की बेताबी , बोझल जिंदगी की ।
इंतज़ार की घड़ी भी है , आंखों मैं पानी है ।
पल दो पल की ही सही , बहुत खूब सूरत ये जवानी है ।
जीवन एक नदिया है , सुख दुख दो किनारे है ।
न जाने कहाँ मंजिल , कौन सहारे है ।
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें