बवंडर बनकर उठ , काल महाकाल सा बन ।
न अलसा खुद को , अपनी पहचान के लिए उठ ।
बवंडर बनकर उठ , काल महाकाल सा बन ।
झांसी की रानी का अनुसरण , हर नारी कर ।
ललकार भर संहार कर , दुष्टों को ललकार कर ।
भवानी तू ही दुर्गा तू ही , खड्ग खप्पर वाली सी बन ।
बवंडर बनकर उठ , काल महाकाल सा बन ।
हुआ बहुत सहन अब , अपने जहन में यह बात भर ।
प्रतिकार कर , वरन मिटा देंगे वो अतित्व तेरा ।
बन तूफान कर प्रलय , दुष्टों का समूल विनाश कर ।
उनका अन्याय का प्रतिशोध कर , जगा तूफान दबा है
जो सीने में ।
ज्वार -भाटा सा उठ , स्थिर समुद्र न बन ।
🚩जय श्री राम🚩
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें