"ऐ सबा जा"
उनको मेरा पयाम कहना ।
"वो ना मिले तो"
उनके शहर को , मेरा सलाम कहना ।
ठहर जाएगी , यह सांसे तब तलक ।
जब तलक , उनके दीदार ना हो ।
उस फरिश्ते को , मेरी सांसों की ।
रफ्तार , बता देना ।
वो खफा रहें या , ना याद करे मुझे ।
ये हो तो , सकता नहीं ।
"फिर भी हम है "
उनको यह एहसास दिला देना ।
"ऐ सबा जा "
उनको मेरा पयाम कहना ।
"वो ना मिले तो"
उनके शहर को , मेरा सलाम कहना ।
"वो मसरूफ है"
अपनी रंग ए महफ़िल में , शायद ।
एक रंग हम भी थे , उनकी महफ़िल के ।
"धुंधला सा ही सही"
या एहसास , उनको दिला देना ।
"ऐ सबा जा"
उनको मेरा पयाम कहना ।
वो ना मिले तो,
उनके शहर को मेरा सलाम कहना ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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