कैसे पूछे ? हाल ए सफर ,
जिंदगी का तेरी ।
कैसे गुजर रही है , यहाँ ।
अनजान राहों में सब कुछ ,
अनजाना है यहाँ ।
कहाँ से आये हो तुम ,
और तुझे जाना है कहाँ ?
मंज़िल है तेरी कौन सी ,
और तेरा ठिकाना है कहाँ ?
तलब क्या है जिंदगी की तेरी ,
इरादों में तुमने ठाना है क्या यहाँ ?
क्या है जुस्तुजू तेरी ,
और तुझे पाना है क्या यहाँ ?
हमसफ़र है कोई ,
राह ए जिंदगी का ।
या तलास है , अभी पाने की ।
अपनी इन खमोश लबों ,
का सबब तो बता ।
क्या खामोश होकर यूँ हीअभी ,
संग संग हमें जाना है यहाँ ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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