मन को बाँध लेती है ,
स्मित तेरी ।
प्रेम तेरा सघन निश्छल ।
अद्भुत तेरा अपनापन ।।
अभी नही है भान तुझको ,
संसार के छलकपट ।
नटखट चंचलता में लिप्त ,
निर्मल तेरा मन ।
बाल क्रीड़ा में मगन । ।
दिव्य ज्योति ,
श्री गणेश अंश ,
दीपिका तनय ।
मुखमंडल पर रहे ,
तेज तेरा व्यापक ।
तू दौहित्र मेरा ,
मेरे हृदय का तू आलिंगन ।
"दिव्यांश"
तेरी रहे सदैव कीर्ति अनन्त ।।
तू जीवन ज्योति हमारी ,
हर्षित तुझसे है हमारा मन ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।
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