भारत भूमि है ऐसे वीरों की ।
प्राणों का जिन्हें कभी , रहा भय नही ।
यह सनातन भूमि है , ऐसे रणबाँकुरों की ।
जिनके कट गए , शीश मगर ।
शीश कभी , झुका नही ।
हुआ शीश , धड़ से पृथक ।
फिर भी खड्ग हाथ से , गिरा नही ।
बुझी प्यास कुछ , अनबुझी सी रही ।
करता रहा , संहार शत्रु दल का "सांगा" ।
जब तक धड़ , भूमि पर गिरा नही ।
भारत भूमि है , ऐसे वीरों की ।
प्राणों का जिन्हें कभी , रहा भय नही ।
जय भारत !बंदेमातरम !
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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