सभी नही कुछ-कुछ , कुछ तो ।
अभी भी ऐसे साथ निभा रहे है ,
जल बिन मछली जैसा,
इक दूजे का साथ निभा रहे है ।
सभी नही कुछ-कुछ , कुछ तो ।
प्यार के दीप में है जैसे , तेल और बाती ।
जलता रहता है दीप उनके ,
प्यार का ।
जब तक रहे दीप में तेल या बाती ।
सभी नही कुछ-कुछ , कुछ तो ।
संग-संग चले है , अंतिम सफर तलक ।
यहां तक तजे प्राण , वो संग संग ।
सभी नही कुछ-कुछ ,कुछ तो ।
रहे प्रेम में प्रथम से अंतिम तलक ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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