ऐ शायर ज़रा अपनी शायरी में ,
मेरी दिल ए ख्वाइश तो लिख ।
बड़ा अरमान है , इसे ।
तेरे तसब्बुर में , कैद होना ।
आरजुओं में , दिल के है यही ।
ग़ज़लों में , मैं तेरी ढलूँ ।
बन कर हर्फ़ मैं मोहब्बत का ,
तेरे दिल में ही पलूँ ।
ऐ शायर ज़रा अपनी शायरी में ,
मेरी दिल ए ख्वाइश तो लिख ।
बड़ा अरमान है इसे ,
तेरे तसब्बुर में कैद होना ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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