ऐ शमा ! तू बतला दे मुझे , कब तबाह करेगी मुझे ।
न जाने अब तक कितने और है , होने को तबाह तेरे इश्क़ की राह में ।
अब बतला भी दे कब तक , रहूँ इंतज़ार में मैं ।
बहुत तड़प रहा हूँ , तेरे इश्क़ में जल जाने को मैं ।
हाय ! रे तमन्ना , कब होगी यह पूरी मेरी ।
ऐ मेरी जान ए बाहर ! कुछ तो , इशारा कर दो मुझे ।
हो जाऊं मैं भी कुर्बान , इश्क की राहों में ।
इस जन्म में न सही तो , अगले जन्म में पाऊँ मैं तुझे ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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