तेरी इन्हीं , अदाओं से ही तो तुम ।
मेरे दिल को , भा जाती हो ।
कुछ पल के लिए ही सही तूम ,
मेरे पास आ जाती हो ।
कोतुहल सा जगा कर ,
दिल में मेरे ।
और आंखों से , ओझल ।
फिर न जाने तुम कहाँ ,
चली जाती हो ।
हाँ इतना तो है , इसे अब ।
संयोग कहूँ या , मेरी मोहब्बत ।
तुम्हें ज्यों ही , याद करता हूँ मैं ।
तुम सामने मेरे , चली आती हो ।
शायद यह ख्वाब हो ,
हाँ ये ख्वाब ही है शायद ।
चलो , ख्वाब ही सही ।
दिल ए करार ,
आ तो जाता है कुछ घड़ी ।
रूबरू तो तुम अब कभी ,
आती नही हो ।
इन्हीं अदाओं से ही तो तुम ,
मेरे दिल को भा जाती हो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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