यह विनती है , माँ तुझसे मेरी ।
नही चाहिये मुझे , धन दौलत बैभव ।
बस मुझे अज्ञानता के ,
भव सागर से , पार करा देना ।
रहना सदा साथ , तू मेरे जीवन भर ।
भटकूँ जो राह मैं जीवन की ,
तू सद्मार्ग दिखा देना ।
न उलझू मैं सुख-दुख के ,
जीवन राह तीरों पर ।
मन को तू मेरे , धैर्यमान बना देना ।
काम क्रोध मोह लालच का ,
विष मुझमे न कभी पनपे ।
यह वरदान मुझे देना ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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