न जाने क्यों.....क्यों ?
मेरे दिल को , क्यों नही आता है करार ।
बिन तुझसे बात किये ।।
न जाने क्यों......क्यों ?
मेरे दिल का , क्यों नही होता है ठहर ।
कहीं और , सिवा तेरे ।।
न जाने क्यों.....क्यों ?
मेरे दिल को , क्यों नही आता है यकीं ।
के तुम मेरा ख्वाब ओ ख्याल हो ।।
न जाने क्यों....क्यों ?
मेरे दिल को , क्यों तुम से है प्यार इतना ।
के कोई इसे भाता ही नही ।
न जाने क्यों ......क्यों ?
मेरे दिल को , क्यों है तेरा ही एहसास हर दम ।
के तसब्बुर में , तेरे सिवा कोई जचता नही ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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