तवायफ खुद तबाह हो गयी बचाते बचाते ,
लाखों बच्चीयों की आबरू ।
"कमवक्त वहशियों से"
फिर भी न बच सकी , कई गुड़िया तब भी ।
समस्या फिर भी बनी है ,
"लाज हर गुड़िया की"
बचाने की अभी ।
न कानून का खोफ है इन बैहशियों को ,
न डर जमाने का है इन्हें ।
न दिखता है इन्हें , किसी का दर्द ।
अब तो जनता को ही लेना होगा , कानून हाथ में ।
करके इनकी ठुकाई ,
"और काट दो लिंग इनका"
बन जाए जो यह नामर्द
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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