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आज मैं क्यों न गाऊं , मुस्कुराऊँ खिल खिलाऊं ।

 आज मैं क्यों न गाऊं , मुस्कुराऊँ खिल खिलाऊं ।

 के सजन मोरे आएंगे , मुझे संग अपने ले जाने ।

आज झूमी नाची मैं , वर्षों बाद रे सखी ! दिल के संग मैं , अपने दिल की गलियों में ।

आज जमीं पे नही कदम मेरे , लगता है यूँ आसमां में उड़ी जा रही मैं ।


 के सजन मोरे आएंगे , मुझे संग अपने ले जाने ।

होगी  रात आज मस्तानी संग मैं रहूंगी  , अपने साजन के ।

रहूंगी बाहों में उनके , वो निहारेंगे मुझे मैं शरमा जाऊंगी ।

ये सोच कर मैं क्यों न इतराऊं , मन बावरा है मेरा । 

मन को सखी ! मैं न रोक पाऊँ , झुमु नाचूँ क्यों न सखी मैं गीत प्यार के गाऊं ।

आज मैं क्यों न गाऊं , मुस्कुराऊँ खिल खिलाऊं । 

संग मैं अपने साजन के अब मैं जाऊं ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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