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अब जरूरत , नही है हमें ।

अब जरूरत , नही है हमें । 

किसी हुश्न की , इश्क के लिए ।

 यह दिल भी अब हमारा , 

आत्मनिर्भर हो गया ।

हाँ आती थी आवाजें दिल की , 

दिल तक कभी ।

अब नही ! 

अब आराम से है ,  दिल मेरा ।

क्योंकि , दिल की दीवारों को, अब हमनें । 

साउंड प्रूफ , कर दिया ।

क्यों उलझे किसी से , 

दिल को सर ए आम , बदनाम कर ।

बे-रहम है ये हुस्न वाले , 

दिल से ही खेला करते थे  ।

इसलिए अब हमने , वापस । 

दिल को , आपने नाम कर दिया ।

यह दिल भी अब हमारा , आत्मनिर्भर हो गया ।

😂😂😂😂

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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