हासिल होगा जरूर होगा तुझे ,
तेरे ख़्वाशिओं का शहर ।
पहले मांझी का , जख्म तो भर जाने दे ।
अभी तो ताज़े है जख्म , "दर्द" रह जाये तो ।
न मुमकिन नही है कि , मंज़िल न मिले ।
मिलेगी जरूर ,सब्र रख ऐ मलंग !
पहले माझी का , जख्म तो भर जाने दे ।
हसरत में है तेरी जो , मंज़िल ए आरजू
निराश न हो साहिल , मिलेगा जरूर
इंतज़ार कर , दर्द मिट जाने तलक के ।
पहले माझी का , ज़ख़्म तो भर जाने दे ।
उमड़ा था जो तूफान , दरम्यां मोहब्बत के ।
थम सा , गया अब ।
ये दिल है मांझी इस , मोहब्बत की कश्ती का ।
बहाल हो जाएगा सफर , मोहब्बत की राहों में ।
"मगर"
पहले माझी का , ज़ख़्म तो भर जाने दे ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
कमाल लिखा ❤️❤️❤️
जवाब देंहटाएंआभार जी 🙏
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