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जुदाई क्या होती है , यह पहले न जाना था ।

जुदाई क्या होती है , यह पहले न जाना था ।

मोहब्बत क्या है , इसे भी पहचाना न था ।

गम क्या होता है , तन्हाई क्या है , तेरे बाद ये जाना है ।

हुई क्यों तुमसे मुलाकात जो , तूने यूँ रूठ कर जाना था ।

तुम्हारी यादों के , सहारे जी लेंगे ।

कसम है मुझे पाक मोहब्बत की , तुझे जमाने में रुसवा न होने देंगे ।

अगर कभी भूल से , याद आ जाये मुझे तेरी ।

चुपके से तस्वीर तेरी , हम देख लेंगे ।

गुजरे वक्त की याद मोहब्बत की में , अश्क हम बह लेंगे ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

26 जून 2017

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