एक छत के नीचे ये , कैसा प्यार है ।
एहसास है प्यार का मगर , दूर दूर ही है जैसे ।
दो पंछी एक पेड़ पर रहते हुए भी , अलग अलग डाल पर रहते है और ।
इक दुजे को टुकर टुकर , देखते ही जाते है ।
अगर कोई एक पास आता है तो , दूसरा उड़ कर दूसरी डाल पर बैठ जाता है ।
साथ बैठना और छेड़ छाड़ करना , भी उन्हें नही सुहाते ।
मगर दोनों इक दूजे के बिना , रह भी नही पाते ।
ये कैसा प्यार है?
😀😀😀
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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