साँसे रहे या न रहे मगर , हमें तेरा ही इन्तज़ार रहेगा ।
यह जन्म तो क्या हर जन्म तक ,
जब तक न मिले तुम हमें ।
सनम ! हर जन्म मुझे , तेरा ही इन्तेजार रहेगा ।
सब्र टूटेगा कैसे भला ,
मेरा ख्वाब ओ ख्याल , जब तुम ही हो ।
लगन लगी है तुमसे ही पिया ,
जिया में हर दम तुम ही हो ।
रुख़सत होगें जब , जमाने से हम ।
अपनी हसरतों में , संग तुझे लिए जाएंगे ।
होगा तुझे भी मलाल मेरे जाने का ,
ऐसा हम असर अपनी , वफ़ाओं का छोड़ जाएंगे ।
होगी तब जुस्तजू तुम्हें मेरी ,
मगर हम फिर न नज़र आएंगे ।
✍🏼ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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