कभी कभी मैं सोचता हूँ 🤔 क्या यह सच है , या मज़ाक है ?
क्या प्यार सच में , ऐसे ही किसी से हो जाता है ?
थोड़ा हँस खेल लिए , अपने सुख - दुःख को बाँट लिये ।
बस इतने से ही से क्या , प्यार हो जाता है ?
या कुछ और भी , औपचारिकता होती होगी ?
मालूम नही ।
कभी कभी मैं सोचता हूँ कि , कहीं मैं अपने ही दिल से , ठगा तो नही जा रहा हूँ ?
या हकीकत में ही , मुझे तुमसे प्यार तो नही हो गया है ?
जो रह -रह कर ध्यान मेरा , तेरी और ही चला जाता है ।
आखिर क्यों , मेरी आरजुओं में शामिल हो तुम ?
जबकि तुम तमन्नाओं में , किसी और की रूबरू हो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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