रूठे यार तुमको मनाऊँ , कैसे हाय ।
दिल को अपने....दिल को अपने मैं ,
समझाऊं कैसे हाय ।
मनाऊँ कैसे हाय...
वो री सजनिया सुन री !!!! बतिया मोरी !!! सुन री बतिया मोरी ।
लागी है तुमसे लग्नवा , लागी तुमसे लग्नवा ।
और कहीं जाऊं कैसे , हाय रे मनाऊँ कैसे ।
रूठे यार तुम....
हुई है नैना जिस दिन तुमसे , चार मोरी !!
हुई है नैना जिस दिन तुमसे , चार मोरी ।
उस दिन से तुम , घट में मोरे बसी हो सजनी , कसम से तोहरी ।
कसम से तोहरी ।
ये मन प्यासा , दे दे प्यार ज़रा सा ,
प्यार ज़रा सा ....बंध जाए जीवन की आशा , जीवन आशा ।
तुम बिन अब तो , जीना कैसे ? तुम बिन अब तो जीना कैसे ?
रूठे सजनिया तुमको मनाये कैसे , मनाये कैसे ?
मैं मन मारा जग से हारा , मैं मन मारा जग से हारा ।
तुम ही मेरे मन के साथी , तुम ही हो मेरे जीवन सहारा , जीवन सहारा ।
रूठे यार तुमको मनाऊँ , कैसे हाय ।
दिल को अपने....दिल को अपने मैं ,
समझाऊं कैसे हाय ।
मनाऊँ कैसे हाय रे मनाऊँ कैसे ...
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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