छुपते छुपाते हम , तुम्हें देखते रहे ।
रहे तुम मसरूफ़ , औरों के संग गुफ्तगू में ।
हम तेरी मुस्कुराहटों का लुफ्त , दूर से ही लेते रहे ।
रहे हम तुमसे दूर , कुछ कदम ही मगर ।
खुद को तेरे ही करीब , महसूस करते रहे ।
ऐसा नही के मौका न मिला हो हमें , तेरे करीब आने का ।
मगर हम तो पहल , आपकी ओर से मिलन का ।
इंतज़ार इत्मिनान से करते रहे ।
आये करीब जब तुम मेरे तो हम , अदाकारी निभाते हुए ।
चौके के जैसे , हमने तुम्हें देखा ही नही ।
दिल में अजीब सी लहर उमड़ पड़ी थी , बड़ी मुश्किल से संभाला था दिल हमने ।
चाह थी इसे , तुम्हें गले से लगाने की ।
खुश हूं बहुत यार के , दूर दूर ही सही ।
एहसासों में तो करीब रहें हम तुम ।
एहसासों में करीब रहे हम तुम ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूडी
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