शेर को सवा शेर आखिर मिल ही जाता है ।
प्रकृति का नियम है ।
कोई किसी का तो ,
किसी का कोई , काल बन ही जाता है ।
अहंकार कब तलक , रहता है सलामत ?
इक दिन तो अहंकारी को , खत्म कर जाता है ।
बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी ।
जिसके हाथों से मरेगी वो ,
तो क्या वो कौन सा खैरियत से ही , राह पायेगा ।
वो तो किसी न किसी के , हाथों मारा जाएगा ।
यह काल का चक्र है , जो घूम फीर कर ।
वापस अपनी ही , जगह पर आएगा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूडी
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