मिली न हो फुरसत उन्हें शायद , हमारे लिए ।
या हमारे आने की खबर , उन्हें हुई न हो ।
या आजमाना चाह रहे हों वो , हमें शायद ।
जो भी हो , यह वो जाने ।
हम तो आ गए है , उनके बुलावे पर ।
उनके बताए हुए , मुकाम पर ।
ठहरूं कितनी देर तलक ,
यह भी तो उन्होंने बतलाया नही है ।
सच में बहुत मुश्किल होता है , सब्र रखना ।
टूट जाये सब्र तो , बहुत मुश्किल होता है ।
किसी का , इंतज़ार करना ।
आएंगे भी वो या नही , क्या पता ।
अभी तलक , उनकी आने की राह ।
हमें कोई दिखती तो नही है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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