कुछ नही है आज , मेरे पास ।
के मैं तुझे , आज कुछ पेश करूँ ।
न जाने क्यों नही ढल रहे ,
मेरे जज़्बात मेरे ख्यालात , कोई नज़्म बनकर ।
आज लगता है शायद , दिल की बज़्म में मेरे ।
रोशन नही हुआ है आज ,
कोई चिराग , किसी का मेरे तसब्बुर में ।
न गम न खुशी का , एहसास है आज मुझे ।
इस बे-दर्द जामना में ,
इस बे-दर्द जमाने पे आज , मुझे हंसी आ रही है ।
कौन सा मुकाम है ये , बे स्वाद सी ।
जो आज ये जिंदगी को , सिफर किये जा रही है ।
कोशिशें कर ली बहुत ,
दिल को भी खंगाल , लिया है हमने ।
नही मिला है आज ,
नही मिला है आज कोई हर्फ़ , मयकशी हो कर ।
✍🏼ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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