हमारा भी उद्धार हो जाए !!!😂😂 देखना कहीं गुड़ की डली कोई ,इधर उधर सरक कर , लुढ़क कर , कहीं मिल जाए ।
चख ले स्वाद हम भी , कैसा होता है , मिर्च लगने के बाद ।
चलो छोड़ो रहने दो अब तो , आदत हो गयी है मिर्चि के खाने की ।
बस पानी से थोड़ा , तीखापन कम कर लेता हूँ ।
अब तो रह भी नही जाता , मर्चि के बिना ।
यदि न दिखे तो उसे , ढूंढने लग जाता हूँ ।
वो भी कम नही , बड़ी मासूमियत सी , भोली सी दिखती है ।
रोज नही बस अब तो , कभी कभी ही तीखी लगती है।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
सांकेतिक अर्थ :- गुड़ की डली ≠ बाहर वाली
मिर्च / मिर्ची = घर वाली
पानी = चुप रहना / शीतल रहना ।
वाह! बहुत बढ़िया।
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