ना जाने कितने राज़ और अभी ,दफन है ,
समय की गर्त में ।
कितने और अभी उजागर होने ,
अभी भी बाकी है ।
बहुत ही खतरनाक साज़िशें हुई है ,
सनातन के बाग को उजड़ने की ।
मगर अफसोस इरादे मकुबुल न हो सके ,
मिटाने चाह जिन्होंने , चमन ए जहां हिन्द का ।
हुये कई जाबांज़ सिपहसालार और ,
बादशाह ए हिन्द के , जिनकी बदौलत ।
सलामत है सनातन और हिन्द ,
आज भी इस जहां में ।
आज नये दौर में नए रूप ,
उभर कर आये है ।
"कुलश्रेष्ठ और इनके सहयोगी "
अलसाये और सुस्त सोये हुए ,
सनातनियों को जगाने ।
जिन बातों से है अपरचित उन बातों को ,
तथ्यों के साथ बताने ।
जागो सोये हुए जागो अभी बक्त है ,
पहचानो खुद की पहचान खुद उभारो ।
यह संदेश तुम्हें देने ,
देश धर्म के यह , शुभचिंतक आये है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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