सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हुई उम्र तमाम हर , तमन्नाएं पूरी मगर ।

 👧꧁💞Զเधॆ🌹Զเधॆ💞꧂

एक बात समझ नहीं आती ⚘

🌿जब प्यार🥀दो लफ्ज़ों की कहानी है तो...


घण्टों chatting में क्या लिखते रहते है।🤔

༺ஜ۩۞🦚Զเधॆ❤Զเधॆ🦚۞۩ஜ༻

👨हुई उम्र तमाम हर , तमन्नाएं पूरी मगर ।

यही दो लफ्ज़ प्यार की कहानी के , 

न पूरे हुए जिंदगी में ।

 हो जाए मुकम्बल जो तो , 

फिर वो शुरुर कहाँ ।

फिर तुम कहाँ , और हम कहाँ ।

हर नए सफर की तलाश में , 

ढूंढते रहेंगे दर बदर यहाँ से वहाँ ।

अच्छा है न हो पूरे ,लफ्ज़ दो प्यार की कहानी के ।

 रहेगा ठहराव , एक ही मुकाम पर ।

 बनती बिगड़ती रहेगी , कहानी प्यार की

दो लफ़्ज़ों के दरमियाँ ।

 ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी  

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वो कोई अब नहीं पूछता हाल ए दिल..

वो कोई अब नहीं पूछता , हाल ए दिल । बनते फिरते थे जो हकीम , हमारी सलामती पर । शिफा की जरूरत थी अब , और वो नदारद है , हमारी गम ए महफिल से । आंखे पथरा गई है , उनकी राह निहारते । न जाने वो हमारी सूनी महफिल में , आएंगे कब। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

थक गया हूं , फ़ज़ूल के इस सफर से ।

थक गया हूं , फ़ज़ूल के इस सफर से । थोड़ा आ ऐ जिंदगी ! संग मेरे , तू भी सुस्ता ले । रहा है साथ तेरा जन्म से , और रहेगा मरण तक । सफर लम्बा रहा है , अब तलक । न जाने आगे रहेगा साथ , कब तलक । आ बैठ पास उर से निकल , पढ़ तो ! प्रभु ने भाग्य लेख में मेरे , क्या क्या रचना रची है । ढल गया हूं जिस्म से , देख तो । मेरे चेहरे पर चमक , कितनी बची है? ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी"मलंग"

हाँ माँ सच तुम होती जो संग हमारे ।

 हाँ माँ मैने खाया आम कच्चा , मैं हूं तेरा लाडला बच्चा । एक आने के लिए फाल्से, दिए बाबा ने केवल चार । तुम भी होती संग नानी के , खाती तुम भी आम का अचार । नाना ने गाड़ी में बिठाया , मेला सारा हमें घुमाया । इक अन्नी का बजा मुझे , मुन्ना को गुब्बारा दिलवाया । नाना ने फिर टपरी में जाकर , चाय पकौड़ी और नमकीन खिलवाया । हाँ माँ ! सच तुम होती जो संग हमारे , चरखी , झूला , नाच कठपुतली का देख कर संग में बजाते ताली । शोर-शराबा कहीं हाथी भालू , नाच रही थी बंदरिया मतवाली । हाँ माँ मैंने खाया आम कच्चा ,मैं हूं तेरा लाडला बच्चा । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी