नही फिक्र कोई , किसी को मेरी ।
सुबह से शाम ढल गयी ।।
नही कोई तेरे सिवा , जिसने मुझे याद किया ।
अब तू ही बात के , क्यों न करे ये दिल प्यार तुझसे ?
जब फिक्र में तुम , मेरी रहती हो ।
भले इनकार करो , तुम इस बात से मगर ।
यादों में तुम भी , मेरे रहती हो ।
हाँ चलो मान लेता हूँ के , नही है प्यार तुझे हमसे ।
तुम जो कहती हो ।।
फिर....फिर ये बताओ के तुम ,
बिन मेरे , तुम क्यों उदास रहती हो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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