कुछ मामलों में झुकना भी , जीत के समान है ।
हर मामलों में झुका जाए , यह भी उचित नही है ।
जरूरी नही हर फैसला , सरकार का उचित हो ।
क्या अनुचित है इस पर ।
किसी और के , बहकावे न आकर ।
खुद का आत्ममंथन हो ।
कभी कुछ ऐसा भी होता है ,
आज अनुचित लगता है ।
किन्तु वो आने वाले कल के लिए , वरदान भी हो ।
#किसान_आंदोलन , किसानों का है मगर ।
हारे हुए , राजनीति पाले पर ।
अपनी जीत , तलास रहे है ।
देश द्रोही भी बीच में घुसकर , हुंकार भर रहे ।
✍🏼ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।
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