आपकी ये अदा भी , हमें दिल से बहुत भाता है ।
आपकी गालियों में भी , हमें प्यार ही प्यार ।
बस , प्यार ही नज़र आता है ।
ये दीवानगी है मेरी , या मेरा पागलपन ।
हर गुल में मुझे तेरा ही , अक्स नज़र आता है ।
आज नही तो कल ही , या कभी न कभी तो ।
तुम्हें भी होगा , एहसास मेरी मोहब्बत का ।
हमें आज भी है , और तब भी रहेगा ।
इंतज़ार , तेरे इकरार ए मोहब्बत का ।
✍️ ज्योति प्रसाद रतूडी
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