अदृश्य होकर कहीं तो , कुछ जल रहा है ।
धुँआ नही मगर , जल कर कुछ तो राख हो रहा है ।
अदृश्य होकर कहीं तो , कुछ जल रहा है ।
जल कर , कोयला बन गए हो तुम ।
शिकन तुम्हारे चेहरे की बतला रही है ।
जलते रहो ,जलते रहो मेरा क्या है ?
बुझ जाओ तो बताना , मिटे जलन तो कहना ।
हम पानी नही की , जली को बुझा देंगें ।
हवा का झोंका है हम , फिर सुलगा देंगें ।
सुलग जाये जब तो ,
हम उस पर फिर , नमक छिड़का देंगे ।
😂😂😂
@रतूड़ी
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