खिली कली मन की , ये इंतज़ार लिए... आएंगे मन भँवरे मोरे ।
न जाने वो अब तलक ,क्यों न आये ?
हाय रे... हाय मोरा जी क्यों , जलाये...वो , क्यों न आये ? रहूँ पिया मैं , तोहरी बाट जुहाये ।
दिन कैसे बीता , बीती कैसी रातियाँ ।
दिल मोरा सजना , किसको बताये , तुम क्यों न आये ?
खिली कली मन की...
जबसे गए पिया तुम प्रदेश , बनके रह गए क्यों ?...तुम परदेशी , तुम परदेशी ।
भूले हो क्यों तुम , वादा अपना ?
तोड़ा दिया क्यों , तुमने वो सपना ? जो मिलके देखे जो मिलके देखे ...हमने साथ ।
साथ न छोड़ेंगे कभी मोरा तुम , ये वादा तुम को क्यों ? याद न आये , याद न आये ।
अब तो आ जा अब तो आ जा...
अब तो आ जा , दरश दिखा जा ।
मन अंखिया मोरी नीर बहाये , तोसे मिलान की आश लगाए ..आश लगाए ।
खिली कली मन की , ये इंतज़ार लिए... आएंगे मन भँवरे मोरे ।
न जाने वो अब तलक ,क्यों न आये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूडी
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