अंगवाठी मारीक त रै ,
हमू रात भर सैयां ।
बतेहरी छ माया इथागा ,
और धानी फंडू फूंका ।
नि च बल , स्वांदूँ अब ,
तनी बात ..बिंगी ल्या दों ।
अभी , शरील खूब नि च ,
खूब थोड़ा जब , शरील ह्वे जालु ।
तब तक जागी रैयाँ ।
मन म्यारु भी , बोदू बल ।
अभी थोड़ा डर च ,
कखि नुकसान ह्वे जालु ।
देर होली पर , सबेर जरूर होली ।
सबेर की जाग म , जगी रैयाँ ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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