एहसास है मुझे तेरे दर्द का मगर , मोहब्बत के बिना तो , दोस्ती नही हुआ करती है ।
मोहब्बत है तो दोस्ती है , और जुदाई में दर्द भी ।
दोस्ती में तो , मोहब्बत खास होती है ।
जो न हो बात बयाँ , कहीं भी दिल की ।
वो दोस्त में , बयाँ होती है ।
बिना मोहब्बत के दोस्ती , कहाँ कायम होती है ।
तुम ही हो मेरे मन के मीत , मेरे दोस्त !
मेरा हम राज़ तुम हो ।
तुमसे ही मेरी , सुबह और शाम होती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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