मुझे और क्या चाहिए , बस इतना ही ।
गुफ्तगुहू के लिए ,
तुम और , तेरा वक्त चाहिए ।
❤️
क्या तुम्हें सुनाई नही दिया ,
मेरा हाल ऐ दिल ।
जो तन्हां है , तेरी जुदाई में ।
हाँ तो क्यों ?
रह रह कर , दिखाई दे रहे हो ।
जैसे चाँद हो , बदली में ।
आ जाओ , कुछ देर तो ठहरों ।
निहार लूँ मैं तुम्हें जी भर ,
कुछ घड़ी , मेरे पास तो बैठो ।
❤️
ख़ुराक ए गम दे , साकी !
ताकि हम भी ,
वक्त अपना गुजार ले , इन तन्हाइयों में ।।
❤️
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें