मुझसे मेरी खुशी की न पूछो रे , ऐ चमन वालों ।
मेरा यार मेरी जान , मुद्दतों से लौट आयी है ।
कैसे बताऊं उन्हें , दिन कैसे गुजरे है उनकी बिरह में ।
तिल तिल , जले है हम ।
हर शाम ए गम , हर तन्हाई में ।
रोको न मेरे कदमों को , थिरक रहे है ये थिरकने दो ।
आज मुद्दतों से मेरा , मन मयूरा झूम उठा है ।
गुनगुनाये जाऊं क्यों न भला मैं , गीत कोई मिलन का ।
के मुझे मेरी हर वो खुशी मेरी , आरजू हासिल हो हो गयी ।
थी जुस्तजू जिसकी तलाश उम्र भर , वो मेरी तलाश मेरी मुकम्बल हो गयी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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