अपने अपने हिसाब से तीनों , पढ़ रहे है ।
अब किस को क्या समझ में आये , यह वक्त ही जाने ।
मष्तिष्क पर सिलबट्टे मेरे भी , कम नही है ।
ज्यादा नही तो , कम ही सही मगर ।
इंसानों से मुझमें भी , बुद्धि का असर थोड़ा तो हुआ है ।
तनिक तुम दोनों , खोपडिया तो हटाओ ।
मैं भी तो देखूँ इसमें , ऐसा क्या छपा हुआ है ।
😂😂
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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