कभी पूरा नही होना चाहिए , इश्क ।
ज्यों ही पूरा हुआ , बस खत्म इश्क ।
रहेगा अधूरा तो , पूरे होने की आश में हुश्न ।
हर बार नई उमंगों लिए ,
अपनी अदाओं में नज़ाकत लिए ।
अपने आशिक को , लुभाती रहेगी ।
चलती रहेगी नय्या , हुश्न और इश्क की ताउम्र ।
जीवन के इस महासागर में ।
हर बार तर ओ ताज़ा प्रेम का , एहसास लिए ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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