जब मैंने पूछा जिंदगी से कि :-
"तू ये बात जिंदगी अब , सफर कितना बाकी है "
कहे जिंदगी कुछ यूँ :-
बस कुछ दूर और या , यूँ कहें के थोड़ा सा और ।
मैं जिंदगी , तेरे साथ ही हूँ तब तलक ।
जब तलक न मिल जाये , तुझे तेरी मंज़िल ।
मिलेगी जब मंज़िल तुझे ,
फिर न होगा एहसास तुझे , खुशी न गम का ।
समझ लेना तू , तेरा तब सफर खत्म ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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